यह एक ऐसी फ़िल्म है जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया है। इसमें 'ईशान' को, जो बहुत कम उम्र का है, अपनी पढाई मैं मुश्किलों का सामना करते दिखाया है। जब वह अपने स्कूल से भाग जाता है मौज-मस्ती करने, तो उसके पिता उसे एक 'बोर्डिंग' स्कूल मैं भेज देतें हैं। वहां पर, उनका नया कला सिखाने वाला अध्यापक पहचान लेता है की उसे डिस्लेक्सिया है. वे उसे ख़ुद अलग से पढाता है ताकि वेह पढाई मैं पीछे न रह जाए।
यह फ़िल्म भारत के परिवारों की, और उनके अटूट बंधनों के बारे मैं बताती है और कैसे एक मानसिक रोग इनके धागों के कच्चेपन की भी झलक दिखलाता है। मैं कहना चाहूंगा की उस बच्चे को कोई सीखने की बीमारी न होकर, एक अलग से सीखने की शक्ति थी।
इसकी कलाकारी मैं कोई कमी नही है, और बिमारी का चित्रण भी सही है। मेरी जानकारी मैं बहुत कम लोग हैं जो इस फ़िल्म को देखके रोये नहीं हैं। इससे देखना न भूलें।
इसमें अध्यापक की भूमिका "अआमिर खान" ने निभाई है, और इसके निर्देशक भी वाही हैं। और जानकारी पाने के लिए आप "www.wikipedia.com" पे भी पा सकते हैं।
