जैसे इस फ़िल्म का नाम बताता है, यह फ़िल्म एक ऐसे स्तिथि की बात बताती है जिसमे एक मनुष्य को अपनेआप से परिचय न हो। इसमे एक व्यक्ति के एक से अधिक अस्तित्व होते हैं, और वे अपने अनेक अस्तित्व के मौजूदगी के बारे मैं नही जानता/जानती। इससे स्प्लिट-पेर्सोनालिटी या मल्टीपल-पेर्सोनालिटी दिसोर्द्र के नाम से जान जाता है, किंतु नै खोज द्वारा, अब इसका नाम दिसोसिअतिवे-इदेंतिती-दिसोर्देर (दी.आई.दी.) है। इससे पीड़ित व्यक्ति को अलग-अलग प्रकार से अपने अस्तित्वओं मैं बाहरी दुनिया का एहसास होता है। यह बिमारी बहुत कम मातृ मैं पायी जाती है, और पूरी दुनिया मैं इस बिमारी के केवल ५० व्यक्तिगत विव्रंद हैं।
यह फ़िल्म तामिल मैं बनायी गयी है, पर मैंने इससे हिंदी मैं देखि है क्योंकि मैं तामिल नही समझता। फ़िल्म बहुत ही विचित्र प्रकार से बनाई गयी है, काफ़ी नयी तकनीकियों का भी प्रयोग किया गया है। महत्वपुर्न्दा कलाकार ने अपना चरित्र भी बहुत अच्छे से निभाया है। कलाकार के असली रूप से अलग, उसके २ और रूप दिखाए गएँ हैं, पहेला जिसमे वह खूनी है, और दूसरा एक आशिक।
फ़िल्म के चित्रंद मैं सबसे बड़ी गलती यह है, की जब उसके दिमागी हालत को जांचा जा रहा था, तो कोई ई.ई.जी नही ली गयी। उसके पहले, खुनी रूप मैं, उसको अपनी आँखे हिलाते बहुत दिखाया गया है, और केवल इन दो वजह से, यह भी कहा जा सकता था की उसे एपिलेप्सी भी हो। किन्तु फ़िल्म बहुत अच्छे से बनाई गयी है और अंत मैं यही कह सकते हैं की यह दी.आई.दी की कल्पना है।
सावधान: यह कमज़ोर दिल वालों के लिए नही है।
Monday, July 14, 2008
अपरिचित
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फ़िल्म लिपिबद्छ
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3 comments:
मैंने इस फिल्म का नाम नहीं सुना था - देखने लायक लगती है।
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maine ajj hi ye flim hindi ma dekhi hai. kaffi intersting film hai.dekhne like hai hero ne appne tino roll acche se nivaye hai
acchi film hai
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