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Saturday, April 12, 2008

बाईपोलर

अगला रोग जिसके बारे में मैं बताना चाहूँगा, है 'बाईपोलर' एक सरल द्रिश्तिकोंद से, इस रोग में पीड़ित व्यक्ति थोड़े समय के लिए डिप्रेशन में चले जाता है, और कुछ समय बाद एकदम उत्तेजित हो जाता है, जिसमें वे बिना अपने फैसले का परिन्दाम सोचे, ग़लत फैसले ले बैठता है इसका भी सबसे आम उधारंद है बिना सोचे पैसे खर्च करते जाना, यह जानते हुए की उसके पास और पैसे नही हैं इस अलग किस्म की उत्तेजित स्तिथि में, पीड़ित व्यक्ति के दिमाग में ख़याल भागने लगते हैं, हर वस्तु उसके लिए रंग-बिरंग हो जाती है, नए आविष्कारों के सोच आते हैं, जिनमे से बहुत कम युक्तिसंगत प्रतीत हों, और धीरे-धीरे ख़याल इस प्रकार से तेज़ हो जाते हैं, की उनको 'पकड़ना' असंभव हो जाता है अर्थात, इतने सारे ख़याल इकट्ठे आते जाते हैं, की इससे पहले एक ख़याल को समझने का वक्त मिले, अनेक और ख़याल चलते हैं, और वह पीड़ित व्यक्ति एकदम काम करना बंद कर देता है, क्योंकि उसकी सोच में, कुछ समय के लिए बाधा जाती है यह डिप्रेशन और उत्तेजित स्तिथि (मेनिया) , एक पेन्द्युलुम की तरह होती है, एक वक्त डिप्रेशन तो अगली घड़ी मेनिया डिप्रेशन और मेनिया के बीच में कभी तो महीनों गुज़र सकते हैं, और अलग किस्म के बाईपोलर में, एक ही दिन में बार मन की स्तिथियाँ बदल सकती हैं

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