Custom Search

Wednesday, February 27, 2008

नई आशा

यह मेरा पहला हिंदी मैं ब्लॉग है। मेरी मातृभाषा तो हिंदी ही है, परंतु हिंदी मैं लिःखे हुए मुझे करीबन दस अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग की साथी साथी मेरी कुछ ख़ास नहीं है और लिख्त गलतियाँ भी कर बैठता हूँ। यह केवल मेरी हिंदी की अध्यापीका हैं, जीनसे मुझे बहुत लगाव है, जिन्होंने हिंदी भाषा में मेरी रूचि बनाए रखी और उसे सुधारा भी। यह पहली बार है की मैं ट्रांस्लितेरेशन का इस्तेमाल कर रहां हूँ। मुझे अभी तक समझ नहीं आया है की 'की' मैं छोटी मात्रा कैसे डालते हैं। यह पोस्ट मेरे लिए एक अभ्यास की तरह ही है। आपको इस अभ्यास में बस एक प्राकथन बताना चाहता हूँ जो मेरी ताई ने मुझे चंद महीने पहले -मेल कीया था। उनको भी याद नहीं की यह किसने कहा था -

"लीक पे चलें वोह, चरण जीनके दुर्बल और हारें हों,
हमें तो, जो हमारी यात्रा से बनें, ऐसे अनीर्मीत पंथ ही प्यारे हैं।"

अगर कीसी को पता चले की यह कीसने कहा है, तो कृपया
मुझे सूचीत करें। एक नई और तंदरुस्त जीवन की आशा में, मैं, अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग की साथी, सोरींग-हाइट्स आप सबको इस रहस्य भरे मन की खुछ कीरदें, हमारे दृष्टीकोंद के द्वारा, आपको दीखाते रहेंगे।